तालाब का पानी गर्मी में एवं सर्दी में गर्म लगता है क्यों

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आवश्यक सामग्री –

३ गिलास या बीकर, 03 अलग-अलग तापमान वाला पानी।

 प्रस्तुतीकरण :

* ग्लास में कुए का सामान्य ताप वाला जल ले लेते हैं। इसे टेबल पर रख देते हैं। लास में पहली ग्लास के पानी की तुलना में गर्म पानी लेते हैं। इस ग्लास को भी

त देते हैं। तीसरी ग्लास में पहली ग्लास के पानी की तुलना में ठण्डा पानी लेते हैं। या को भी टेबल पर रख देते हैं। तीनों ग्लास इस तरह से टेबल पर रखते हैं कि सामान्य पानी वाली पहली ग्लास दोनों ग्लासों के बीच में हों। यह जानकारी दर्शक बच्चों को र देते जाते हैं। अब सबसे पहले अपनी उंगली गर्म पानी के ग्लास में बोते हैं, और थोड़ी – बाद निकाल कर बीच के सामान्य ताप वाले पानी की ग्लास में डुबोते हैं, और पानी के तापमान का अनुभव करते हैं। अब अपनी उंगली कम ताप वाले पानी की ग्लास में डुबोते हैं. और थोड़ी देर दाद फिर सामान्य ताप वाले पानी के ग्लास में डूबोते हैं, और पानी के तापमान का पुनः अनुभव करते हैं। इस बार सामान्य ताप वाला पानी इसके पूर्व (जब उगली गर्म पानी से निकाल कर सामान्य ताप वाले पानी में डाले थे) की तुलना में ज्यादा गर्म महसूस होगा। जबकि पानी का तापमान वही है। इस प्रयोग को कुछ बच्चों से भी उसी समय करावें तथा सभी बच्चों को अपने घर में करने के लिये भी कहें।

वैज्ञानिक कारण :

ग्रीष्म ऋतु में – गर्मी के दिनों में वातावरण का ताप अधिक होने के कारण हमारे शरीर के बाहरी हिस्से का ताप भी अधिक होता है। कुए या तालाब के पानी के संपर्क में जैसे ही हमारा शरीर आता है, शरीर एवं पानी के ताप में अधिक अंतर होने के कारण उष्मा शरीर से तेजी से पानी की और स्थानांतरित होती है । अतः उष्मा स्थानांतरण की दर अधिक होती है। जिसके कारण गर्मी के ना में कुए या तालाब का पानी शीत ऋतु की तुलना में हमें ठण्डा महसूस होता है।

शीत ऋतु में :

तु में शरीर के बाहरी हिस्से का ताप कम होता है। जैसे ही हमारा शरीर कुए या तालाब के

संपर्क में आता है, तो शरीर एवं पानी के ताप में अंतर कम होने के कारण उष्मा ” का दर कम होती है। जिसके कारण शीत ऋतु में वही पानी ग्रीष्म ऋतु की तुलना में

होता है। इस प्रकार कए के पानी का तापमान गर्मी एवं सर्दी दोनों मौसम में एक है, केवल मौसम के बदलने पर वातावरण के तापमान में अंतर के कारण हमें गमों में

गर्म महसूस होता है। इस प्रकार समान रहता है, केवल मौसम के

लाब का पानी ठण्डा एवं सदी में गर्म महसूस होता है।

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नारियल की जाता में आग लगाना

आवश्यक सामग्री:

सोडियम धातु, चाकू नारियल, ब्लॉटिंग पेपर|

चमत्कार के प्रदर्शन के पूर्व की तैयारी:

चमत्कार के प्रदर्शन के पूर्व सोडियम धातु को मिट्टीतेल से निकालकर चाकू से उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लेते हैं। ऐसे 4-5 टुकड़े लेकर उन्हें ब्लॉटिंग पेपर से सुखा लेते हैं। इन टुकड़ों को नारियल की जटाओं में अलग-अलग जगह पर, अंदर इस तरह से प्रवेश करा देते हैं, कि बाहर से दिखाई न देखें।

चमत्कार का प्रदर्शन :-

नारियल को दिखाते हुये उसे बच्चों के समक्ष टेबल पर रख देते हैं। अब कोई एक मंत्र का

उच्चारण करते हुये नारियल की जटाओं पर पानी सींचते हैं। जैसे ही पानी नारियल की जटा के अंदर सोडियम के टुकड़ों के संपर्क में आता है, सोडियम की पानी से क्रिया के कारण अत्यधिक उमा उत्पन्न होती है। इस उष्मा के कारण नारियल की जटाओं में आग लग जाती है एवं जटाएं

जलने लगती हैं। बच्चे ऐसा समझने लगते हैं कि आग मंत्र शक्ति से उत्पन्न हुई है।

वैज्ञानिक कारणः

सोडियम की पानी से क्रिया, एक उष्माक्षेपी (Highly Exothermic)क्रिया है। जैसे ही सोडियम पानी के संपर्क में आकर पानी से क्रिया करता है, तो सोडियम हाईड्राक्साईड (NaOH) बनता है। एवं तेजी से हाईड्रोजन (HA) गैस निकलती है। उच्च उष्मा के कारण हाईड्रोजन गैस जल उठती

है। इसी के साथ नारियल की जटाएं भी जलने लगती हैं।

सावधानियां :

इस प्रयोग को अत्यंत सावधानी से करने की आवश्यकता है तथा इससे बच्चों को दूर रखना चाहिये।

रासायनिक अभिक्रिया :

2Na +2H50

→ 2NaOH + H,

प्रश्न एवं उत्तर :प्र-नारियल का वैज्ञानिक नाम क्या है?

उ-काकस न्यूसीफा

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