द्रव नाइट्रोजन के चमत्कार

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आवश्यक सामग्री –

द्रव नाइट्रोजन, मुलायम रबर का टुकड़ा (साइकिल ट्युब रबर), केला, लोहे की एक लोहे का छल्ला जिसमें लोहे की बॉल प्रवेश न करती हो, फूल एवं पत्तियों, फूला हुआ का पाइप या हथोड़ी थर्माकॉल का डिब्बा, दस्तानें

तैयारी :

सभी आवश्यक सामग्री तैयार करके मेज पर रख लेते हैं, ट्युब रबर, केला, फूल एवं पत्तियों हुआ बलून, इन सामग्री को इनकी प्रकृति के आधार पर इनके गुणों को प्रदर्शित करते हैं । ट्युब रबर को खीचकर, केले को मोड़कर, फूल एवं पत्तियों को मोड़कर दिखाते है। लोहे की , को लोहे के छल्ले के अन्दर प्रवेश कराने का प्रयास करते हैं जिससे लोहे की बॉल ,लोहे के छल्ले के अन्दर प्रवेश नहीं करती है , क्योकि छल्ले का आकार बॉल से बहुत कम बड़ा होता है|

प्रदर्शन :

द्रव नाइट्रोजन को थर्माकॉल के डिब्बे में रबर का टुकड़ा, केले, लोहे की बॉल, फूल एवं पत्तियाँ, फूला हुआ बलून डालकर उपर से ढक्कन ढाककर दो मिनट के लिये रख देते हैं। तथा बारी-बारी

से इन वस्तुओं को निकालकर निम्नानुसार प्रदर्शन करते हैं। 1 रबर :- द्रव नाइट्रोजन से निकालने पर मुलायम रबर इतना कड़ा हो जाता है कि उसे मसलने पर उसका चूर्ण बन जाता है। 2 केला :- केला इतना कड़ा हो जाता है कि उसे लोहे के पाइप या हथैड़ी पर पटकने से वह तड़-तड़ की आवाज के साथ टुकड़े-टुकड़े हो जाता है। 3 लोहे की बॉल :- लोहे की बॉल लोहे के छल्ले के अन्दर प्रवेश कर जाती है। 4 फूल एवं पत्तियाँ :- रगड़ने पर चूर्ण बन जाता है। 5 फूला हुआ बलून डालकर :- बलून पिचक जाता है अर्थात उसका आयतन बहुत कम हो जाता है। जब बलून को थोड़ी देर खुले में रखते है तो वह पुनः अपनी पूर्वावस्था में आ जाता है।

वैज्ञानिक कारण :

द्रव नाइट्रोजन का ताप -195.79 से -238 डिग्री सेल्सियस होता है। जब इसके अन्दर इन वस्तुओं को रखा जाता है, तब ताप में कमी के कारण पदार्थ के अणु पास-पास आ जाते हैं, जिससे पदार्थ की प्रकृति के अनुसार निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं।

पढ़े चलो बढ़े चलो।

“जादू नहीं विज्ञान है, समझना-समझानी आसान है।

1 रबर –

दव नाइट्रोजन में डालने पर रबर के अणु इतने पास-पास आ जाते हैं कि वह बहुत कड़ा हो जाता है और उसका चूर्ण बनाया जा सकता है। रबर को दोनों हाथों से मसलने पर रबर का चूर्ण बन जाता है। रबर निम्न ताप पर अपनी प्रत्यास्थता खोकर क्रिस्टलीय अवस्था प्राप्त कर लेता है।

 2 केला : –

लोहे के पाइप से प्रहार करने पर केले से ठोस पदार्थ जैसी आवाज आती है। निम्न ताप पर अणुओं के बीच दूरी कम हो जाती है और आकर्षण बल बढ़ जाती है। केले में उपस्थित नमी के कारण यह बर्फ जैसी ठोस अवस्था प्राप्त कर लेता है, जिससे पाइप से प्रहार करने पर केले से ठोस पदार्थ जैसी आवाज आती है एवं यह भंगूर होकर टूटता है।

3 लोहे की बॉल :-

लोहे की बॉल लोहे के छल्ले के अन्दर प्रवेश कर जाती है। ताप कम होने से धातुओं में सम्पीडन । होता है जिससे लोहे की बॉल का आयतन कम हो जाता है और लोहे की बॉल लोहे के छल्ले के अन्दर प्रवेश कर जाती है ।

4 फूल एवं पत्तियाँ :

रगड़ने पर चूर्ण बन जाता है क्योंकि अति निम्न ताप पर फूल एवं पत्तियॉ किस्टलीय अवस्था प्राप्त कर लेती हैं।

5 फूला हुआ बलून डालकर :

बलून पिचक जाता है क्योंकि अति निम्न ताप पर गैस के अणुओं में सम्पीडन होता है। कुछ देर कमरे के ताप पर बलून को रखने पर गैस के अणुओं में प्रसार होने से पिचका बलून पुनः फूल जाता है।

सावधानियाँ :

1 प्रयोग दस्ताने पहनकर करना चाहिए।

2 रबर को मसलते समय दस्ताने पहने होने चाहिए ।

प्रश्न एवं उत्तर :

प्र0:- द्रव नाइट्रोजन का उपयोग क्या है ? उ0:– कृत्रिम गर्भाधान में वीर्य को सुरक्षित रखने के लिये एवं प्रयोग शालाओं में । प्र0:- नाइट्रोजन आवर्त सारणी में किस ब्लॉक का तत्व है ? उ0:- p ब्लॉक का तत्व है। प्र0:- नाइट्रोजन संयोजकता कितनी होती है ? उ0:- इसकी संयोजकता तीन है।

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